होली के रंगों की मस्ती में डूबे 8 वीं के छात्र की नदी में डूबकर मौत हो गयी। छात्र की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। सूचना पर पहुंचे तहसील प्रशासन ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया तथा परिजनों के साथ छात्र की मौत का ढांढस बंधाया। शुक्रवार को पूरा देश होली के रंगों में रंगा था। मिलक कोतवाली क्षेत्र के केवलपुर गांव निवासी अमरपाल का 14 वर्षीय पुत्र अजय शुक्रवार की सुबह होली खेलने घर से बाहर निकला था। परिवार व दोस्तों के साथ जमकर रंगों की होली खेली। सुबह दस बजे करीब रंगोत्सव के बाद अजय दोस्तों के साथ गांव के समीप से गुजर रही सैंजना नदी में नहाने चला गया। होली की मस्ती करते हुए अजय व उसका एक अन्य दोस्त पानी के गहरे खड्ढे में पहुंच गए। अजय गहरे गड्ढे में समा गया लेकिन उसका दोस्त बचाओ बचाओ चिल्लाने लगा। इस दौरान अन्य साथियों ने डूबते हुए साथी को पानी के गहरे गड्ढे से बाहर निकाला तथा डूबने से बचा लिया। इसके बाद सभी का ध्यान एकाएक अजय की ओर आकर्षित हुआ कि आखिर अजय कहाँ है। अपने आसपास से अजय को गायब देख उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। सभी अजय के घर की तरफ दौड़ लगा दी और घर जाकर पूछा कि अजय कहाँ तो परिजनों ने बताया कि वह सुबह से ही होली खेलने घर से बाहर गया हुआ है अभी तक वह घर नहीं लौटा है। साथियों ने अजय के डूबने की घटना समझने में देरी नहीं कि तथा तत्काल अजय के डूबने की सूचना परिजनों को दी। सूचना से पूरा गांव नदी की तरफ दौड़ गया। गांव के गोताखोरों ने अजय को की नदी में बहुत खोजबीन की लेकिन उसका कोई सुराग हाथ नहीं लगा। इस दौरान सूचना पाकर एसडीएम सुनील कुमार तथा सीओ राजवीर सिंह परिहार घटना स्थल पर पहुंच गए। अधिकारियों के कहने पर ग्रामीणों ने अजय को ढूढने की एक बार फिर कोशिश की। ग्रामीणों ने बड़े बड़े बांसों में बंधे जाल को पुनः नदी की सतह तक घुमाया तो अजय बेहोश अवस्था मे मिला। नदी से बाहर निकालते ही अजय को मिलक के सरकारी अस्पताल लाया गया जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। अजय की मौत से असंतुष्ट परिजन अजय के शव को लेकर मिलक के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। मृतक रास डांडिया स्थित एक स्कूल में कक्षा 8 का होनहार छात्र था। मृतक दो भाई तथा दो बहनें हैं। मृतक परिवार में सबसे बड़ा बेटा था। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है। अजय की अचानक दर्दनाक मौत से परिवार में खुशी का माहौल गम में बदल गया।पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को शव का इंतजार है।
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