बुधवार को 86 वें उर्से इनायती राहती का पहला दिन था, उर्स के पहले दिन सुबह लखनऊ से तशरीफ़ लाए मस्जिद शाहे रज़ा के पेशे इमाम हाफिज़ व क़ारी अनवार साहब जहाँगीरी ने उर्से मे आए हुए दादा मियाँ के चाहने वालों के साथ और अक़ीदतमंद हज़रात के साथ दरगाह शरीफ़ पर फ़ातेहा व सलातो सलाम पढ़ा और सभी के लिए दुआए ख़ैर की।हज़रत ख़्वाजा मुहम्मद इनायत हसन शाह रहमतुल्लाह अलैह और हज़रत ख़्वाजा मुहम्मद राहत हसन शाह रहमतुल्लाह अलैह का सालाना उर्स हर साल बहुत ही शानो शौकत के साथ मनाया जाता है जिसमें शिरकत करने के लिए हिंदुस्तान के हर राज्य से आपके चाहने वाले हज़रात तशरीफ़ लाते हैं और आपकी बारगाह में खिराजे अक़ीदत पेश करते हैं। आपके मुरीदीन हज़रत हिंदुस्तान के बहुत सारे राज्यों में, जैसे कि महाराष्ट्र, छत्तीसगड़, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंण्ड, मौजूद हैं। इन सभी जगहों से आपके चाहने वाले हज़रात अपने अपने मुरीदों के साथ उर्स में शिरकत करने के लिए तशरीफ़ लाते हैं।उर्से मे आने वाले सभी ज़ाएरीन के लिए के बड़े पैमाने पर लंगर के एहतेमाम होता है और आपके लंगर ख़ाने मे सभी लोग एक साथ बैठ कर लंगर खाते हैं और बुज़ुर्गों के फ़ैज़ाने से मालामाल होते हैं। बुधवार को उर्स का पहला दिन था। शाम 6 बजे दरगाह शरीफ़ पर सरकारी चादर शरीफ़ पेश की गई, सरकारी चादर दरगाह इनायती, राहती और फ़साहती के सज्जादानशीन हज़रत ख़्वाजा मुहम्मद सबाहत हसन शाह मद्देज़िल्लहुल आली के घर से चल कर दरगाह शरीफ़ पर पहुँची, जिसमें बड़ी तादाद में लोगों ने शिरकत की। चादर शरीफ़ से पहले महफ़िले समा का आयोजन हुआ जिसमें क़व्वालों ने सूफ़ियाना कलाम पेश किए और सुनने वाले लोगों को अपने क़व्वाली से मस्त कर दिया। चादर चढ़ाने के बाद दरगाह शरीफ़ के सज्जादानशीन हज़रत ख़्वाजा मुहम्मद सबाहत हसन शाह मद्देज़िल्लहुल आली ने सभी के लिए दुआए ख़ैर की, और मुल्क व सूबे की ख़ुशहाली के लिए दुआ की। सरकारी चादर के जुलूस में बम्बई, कलकत्ता, पंजाब, बनारस, फ़रीदपुर, कलियर, हरिद्वार, बरेली आदि जगहों से आए हुए मंसूर भाई, फ़रीद सबाहती, हकीम साहब, रफ़ीक अहमद साहब, रईस खाँ, सुहैल ख़ान, मौलाना अनवार जहाँगीरी लखनवी, मौलाना नवाज़ ग़ाज़ीपुरी, मौलाना शहाबुद्दीन मिस्बाही, मुनव्वर शैख़, दाऊद अहमद आदी लोगों ने शिरकत की।
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