रामपुर शहर के फूटा महल स्थित दिगंबर पार्श्वनाथ जैन मंदिर में प्रातः काल दिगंबर जैन मुनि सहज सागर महाराज और नव पदम सागर महाराज के पावन सानिध्य में पूजन, अभिषेक और शांति धारा का आयोजन किया गया। इस पवित्र अवसर पर मुनि महाराजों के प्रवचन हुए, जिसमें उन्होंने जीवन को सात्विकता और संयम से सुसज्जित करने का संदेश दिया। इसके उपरांत मुनि महाराजों की आहारचर्या कस्तूरचंद जैन और प्रमोद कुमार जैन एडवोकेट के निवास पर संपन्न हुई। दोपहर 1:00 बजे से 16वें तीर्थंकर शांतिनाथ का विधान समस्त जैन समाज की उत्साहपूर्ण सहभागिता के साथ आयोजित हुआ। शुद्ध सात्विक वस्त्रों में मुकुट और आभूषणों एवं पीले वस्त्रों पहनकर संपन्न किए गए।इस विधान के फल के बारे में मुनिराज ने बताया कि यह सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करता है। इससे रोग, शोक और जीवन के अभाव समाप्त होते हैं। साथ ही समाज में वात्सल्य, प्रेम और शांति का स्थायित्व होता है। उन्होंने छोटे-छोटे नियमों और संयमित जीवनशैली अपनाकर मोक्ष मार्ग पर चलने का मार्गदर्शन भी दिया।शांतिनाथ विधान में प्रमोद कुमार जैन और अंजू जैन ने सौधर्म इंद्र के रूप में, कस्तूरचंद जैन और शोभा जैन ने यज्ञ नायक के रूप में भाग लिया। मंगल कलश स्थापना सौरभ खंडेलवाल और मेघा खंडेलवाल द्वारा की गई, जबकि दीप प्रज्ज्वलन मनोज जैन और वर्षा जैन ने किया। चार मंगल कलश सुरभि जैन, वर्षा जैन, कीर्ति जैन और मेघा खंडेलवाल द्वारा अर्पित किए गए।शाम 7:00 बजे से गुरु भक्ति का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने अपनी भावनाएं गद्य और पद्य में गुरु महाराज के चरणों में समर्पित कीं। इस अवसर पर जैन समाज के अनुयायी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। मुनि महाराजों ने अपने प्रवचन में सभी को सात्विक जीवन और गुरु भक्ति के महत्व को समझाते हुए आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग दिखाया।
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