शुक्रवार को 86 वें उर्से इनायती राहती का तीसरा दिन था। मुल्क के कोने कोने में चाहने वाले अक़ीदतमंद हज़रात तशरीफ़ ला रहे हैं। सुबह 7 बजे दरगाह शरीफ़ पर क़ुरआन ख़्वानी का आयोजन हुआ।जिसमें मुर्शिद नगर भैंसोड़ी शरीफ़ के हाफ़िज़ व क़ारी फ़सीहलु हसन उर्फ़ दद्दा मियाँ ने ज़ाएरीने किराम के साथ दरगाह शरीफ़ पर फ़ातेहा व सलातो सलाम पढ़ा क़ुरआन ख़्वानी के बाद सभी के लिए दुआए ख़ैर की। आज का सबसे अहम प्रोग्राम क़ुल शरीफ़ की महफ़िल थी। जिसमें हज़ारों की तादाद में सूफ़िया किराम ने शिरकत की। क़ुल शरीफ़ का दिन साहिबे मज़ार के विसाल का दिन होता हैं और इस दिन उनसे मोहब्बत करने वाले सभी लोग उनकी बारगाह में हाज़िरी देते हैं और ख़िराजे अक़ीदत पेश करते हैं।शुक्रवार को क़ुल शरीफ़ की महफ़िल में ज़ाएरीन का भारी हुजूम था। अरबी शिजरे के साथ फ़ातेहा ख़्वानी हुई, जिसमें सभी हाज़िरीन ने झूम झूम के शिजरा पढ़ा और उसके बाद दरगाह इनायती, दरगाह राहती, और दरगाह फ़साहती के सज्जादानशीन हज़रत ख़्वाजा मुहम्मद सबाहत हसन शाह मद्देज़िल्लहुल आली ने क़ौमो मिल्लत की तरक्की के लिए मुल्क की ख़ुशहाली व तरक्की के लिए दुआ माँगी गई।क़ुल शरीफ़ की महफ़िल के बाद रंगे महफ़िल का अयोजन हुआ जिसमें क़व्वालों ने रंगे महफ़िल के कलाम पेश किए जिसे सुन कर सूफ़ी हज़रात झूमने लगे। क़ुल शरीफ़ की महफ़िल में बम्बई से शेख ख़ान फ़साहती, सुलेमान सबाहती, मोहम्मद आदिल सबाहती, सूफ़ी एज़ाज़ सबाहती, सूफ़ी मोहम्मद अली फ़साहती, सूफ़ी इरफ़ान फ़साहती उर्फ बाबा आदि ने शिरकत की।
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